Dil Dhundta Hai - Duet Version

दिल ढूँढता
है फिर वही
फ़ुरसत के रात दिन
दिल ढूँढता
है फिर वही
फ़ुरसत के रात दिन
बैठे रहे
तसव्वुर-ए-जानाँ किये हुए
दिल ढूँढता
है फिर वही
फ़ुरसत के रात दिन
दिल ढूँढता
है फिर वही...

जाड़ों की नर्म धूप और
आँगन में लेट कर
जाड़ों की नर्म धूप और
आँगन में लेट कर
आँखों पे खींचकर तेरे धामन के साये को
आँखों पे खींचकर तेरे धामन के साये को
औंधे पड़े रहें कभी करवट लिये हुए
दिल ढूँढता है...
दिल ढूँढता
है फिर वही
फ़ुरसत के रात दिन
दिल ढूँढता
है फिर वही...

या गरमियों की रात जो पुरवाईयाँ चलें
या गरमियों की रात जो पुरवाईयाँ चलें
ठंडी सफ़ेद चादरों पे जागें देर तक
ठंडी सफ़ेद चादरों पे जागें देर तक
तारों को देखते रहें छत पर पड़े हुए
दिल ढूँढता है...
दिल ढूँढता
है फिर वही
फ़ुरसत के रात दिन
दिल ढूँढता
है फिर वही...

बर्फ़ीली सर्दियों में किसी भी पहाड़ पर
बर्फ़ीली सर्दियों में किसी भी पहाड़ पर
वादी में गूँजती हुई खामोशियाँ सुनें
वादी में गूँजती हुई खामोशियाँ सुनें
आँखों में भीगे-भीगे से लम्हें लिये हुए
दिल ढूँढता है...
दिल ढूँढता
है फिर वही
फ़ुरसत के रात दिन
दिल ढूँढता
है फिर वही
फ़ुरसत के रात दिन
बैठे रहे
तसव्वुर-ए-जानाँ किये हुए
दिल ढूँढता
है फिर वही
फ़ुरसत के रात दिन
दिल ढूँढता
है फिर वही...

दिल ढूँढता है
फिर वही
फ़ुरसत के रात दिन
बैठे रहे
तसव्वुर-ए-जानाँ किये हुए
दिल ढूँढता है
फिर वही
फ़ुरसत के रात दिन



Credits
Writer(s): Gulzar, Madan Mohan
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