Lal Chhadi Maidan Khadi (From "Janwar")

लाल छड़ी मैदान खड़ी
क्या ख़ूब लड़ी, क्या ख़ूब लड़ी

हम दिल से गए, हम जाँ से गए
बस आँख मिली और बात बढ़ी

लाल छड़ी मैदान खड़ी
क्या ख़ूब लड़ी, क्या ख़ूब लड़ी

हम दिल से गए, हम जाँ से गए
बस आँख मिली और बात बढ़ी

लाल छड़ी मैदान खड़ी

ओ, तीखे-तीखे दो नैना, उस शोख़ से आँख मिलाना था
देनी थी क़यामत को दावत, इक आफ़त से टकराना था
ओ, तीखे-तीखे दो नैना, उस शोख़ से आँख मिलाना था
देनी थी क़यामत को दावत, इक आफ़त से टकराना था

मत पूछो, हम पर क्या गुज़री
बिजली सी गिरी और दिल पे पड़ी

हम दिल से गए, हाए
हम दिल से गए, हम जाँ से गए
बस आँख मिली और बात बढ़ी

लाल छड़ी मैदान खड़ी

हमको भी ना जाने क्या सूझी! जा पहुँचे उसकी टोली में
हर बात में उसकी था वो असर, जो नहीं बँदूक की गोली में
हमको भी ना जाने क्या सूझी! जा पहुँचे उसकी टोली में
हर बात में उसकी था वो असर, जो नहीं बँदूक की गोली में

अब क्या कीजे? अब क्या होगा?
हर एक घड़ी मुश्किल की घड़ी

हम दिल से गए, हाए
हम दिल से गए, हम जाँ से गए
बस आँख मिली और बात बढ़ी

लाल छड़ी मैदान खड़ी

तन-तन कर ज़ालिम ने अपना हर तीर निशाने पर मारा
है शुक्र के अब तक ज़िंदा हूँ, मैं दिल का घायल बेचारा
तन-तन कर ज़ालिम ने अपना हर तीर निशाने पर मारा
है शुक्र के अब तक ज़िंदा हूँ, मैं दिल का घायल बेचारा

उसे देख के लाल दुपट्टे में
मैंने नाम दिया है, "लाल छड़ी"

हम दिल से गए, हाए
हम दिल से गए, हम जाँ से गए
बस आँख मिली और बात बढ़ी

लाल छड़ी, मैदान खड़ी



Credits
Writer(s): Shankar-jaikishan, Shailendra
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