Chal Lade Re Bhaiya

चल लड़ें रे भैया दिन निकला
चल लड़ें रे भैया धूप खिली
चल लड़ें रे भैया शाम ढली
चल लड़ें रे भैया रात चढ़ी

चल लड़ें रे भैया दिन निकला
चल लड़ें रे भैया धूप खिली
चल लड़ें रे भैया शाम ढली
चल लड़ें रे भैया रात चढ़ी

ये शौक हमारा ऐसा तो
इस शौक में साथ ओ शोखी है
सब शौक दूसरे फीके हैं
सब बिन तड़के की लौकी हैं

जो लड़ता है, वो जीता है
जो लड़ता है, वो जीता है
जो नही लड़ा वो सुबह शाम साँसों की गिनती करता है
राहों में अपनी मछली तैरे, आजा सागर तोड़ें
लड़ते-लड़ते साँसें लें आ, लड़ते-लड़ते छोड़ें

चल लड़ें रे भैया दिन निकला
चल लड़ें रे भैया धूप खिली
चल लड़ें रे भैया शाम ढली
चल लड़ें रे भैया रात चढ़ी

चल लड़ें रे भैया दिन निकला
चल लड़ें रे भैया धूप खिली
चल लड़ें रे भैया शाम ढली
चल लड़ें रे भैया रात चढ़ी

साँसों में ही दौड़ता रहेगा क्या खून
रोटियाँ ही तोड़ता रहेगा क्या खून
आँखों में नही जो उतरा लहू अगर
लाल है या पीला ये कैसे पड़ेगी खबर?
कैसे पड़ेगी खबर?

अगर जीना है ऐसे तो मरोगे भी तो क्या
खून को बचा के सेल करोगे भी तो क्या
खून का तो दही भी नही है जमता
इसको कल-कल बेह जाने दो
इसमें चल-चल बेह जाने दो

चल लड़ें रे भैया दिन निकला
चल लड़ें रे भैया धूप खिली
चल लड़ें रे भैया शाम ढली
चल लड़ें रे भैया रात चढ़ी

चल लड़ें रे भैया दिन निकला
चल लड़ें रे भैया धूप खिली
चल लड़ें रे भैया शाम ढली
चल लड़ें रे भैया रात चढ़ी

लड़े-लड़े-लड़े-लड़े रे
लड़े-लड़े-लड़े-लड़े रे
गा मा पा नी सा
गा मा पा नी सा
गा मा पा नी सा

जो लड़ता है, वो जीता है
जो लड़ता है, वो जीता है
जो नही लड़ा वो सुबह शाम साँसों की गिनती करता है
सर तोड़े घंटों हमने, अब आँचल माथे तोड़ें
लड़ते-लड़ते साँसें लें आ, लड़ते-लड़ते छोड़ें

चल लड़ें रे भैया दिन निकला
चल लड़ें रे भैया धूप खिली
चल लड़ें रे भैया शाम ढली
चल लड़ें रे भैया रात चढ़ी

चल लड़ें रे भैया दिन निकला
चल लड़ें रे भैया धूप खिली
चल लड़ें रे भैया शाम ढली
चल लड़ें रे भैया रात चढ़ी

चल लड़ें रे भैया दिन निकला
चल लड़ें रे भैया धूप खिली
चल लड़ें रे भैया शाम ढली
चल लड़ें रे भैया रात चढ़ी



Credits
Writer(s): Puneet Sharma, Sanjeev Srivastava
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