Panchhi Nadiyan Pawan Ke Jhonke (with Dialogues)

ऊपर वाले ने अपनी मोहब्बत के सदके में
हम सब के लिए ये धरती बनाई थी
पर मोहब्बत के दुश्मनों ने
इस पर लक़ीरें खींच के सरहदें बना दी

मैं जानता हूँ वो लोग तुम्हें इस पार नहीं आने देंगे
मगर ये पवन जो तुम्हारे यहाँ से होकर आयी है
तुम्हें छू कर आयी होगी
मैं इसे साँस बना कर अपने सीने में भर लूँगा

ये नदियाँ जिसपर झुक कर तुम पानी पिया करते हो
मैं इसके पानी से अपने प्यासे होंठों को भिगो लूँगी
समझूँगी तुम्हारे होंठों को छू लिया

पंछी, नदियाँ, पवन के झोंकें
कोई सरहद ना इन्हें रोकें

पंछी, नदियाँ, पवन के झोंकें
कोई सरहद ना इन्हें रोकें
सरहदें इंसानों के लिए हैं
सोचो, तुमने और मैंने क्या पाया इंसाँ होके

पंछी, नदियाँ, पवन के झोंकें
कोई सरहद ना इन्हें रोकें
सरहदें इंसानों के लिए हैं
सोचो, तुमने और मैंने क्या पाया इंसाँ होके

जो हम दोनों पंछी होते
तैरते हम इस नील गगन में पंख पसारे
सारी धरती अपनी होती
अपने होते सारे नज़ारें

खुली फ़िज़ाओं में उड़ते
खुली फ़िज़ाओं में उड़ते
अपने दिलों में हम सारा प्यार समाँ के

पंछी, नदियाँ, पवन के झोंकें
कोई सरहद ना इन्हें रोकें
सरहदें इंसानों के लिए हैं
सोचो, तुमने और मैंने क्या पाया इंसाँ होके

जो मैं होती नदिया और तुम पवन के झोंके तो क्या होता?
हो, जो मैं होती नदिया और तुम पवन के झोंके तो क्या होता?
पवन के झोंकें नदी के तन को जब छूते हैं
पवन के झोंकें नदी के तन को जब छूते हैं

लहरें ही लहरें बनती हैं
हम दोनों जो मिलते तो कुछ ऐसा होता
सब कहते, "ये लहर-लहर जहाँ भी जाए इनको ना कोई टोके"

पंछी, नदियाँ, पवन के झोंकें
कोई सरहद ना इन्हें रोकें
सरहदें इंसानों के लिए हैं
सोचो, तुमने और मैंने क्या पाया इंसाँ होके

पंछी, नदियाँ, पवन के झोंकें
कोई सरहद ना इन्हें रोकें



Credits
Writer(s): Javed Akhtar
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