Panghat (From "Roohi")

बहुत कठिन है डगर पनघट की

बहुत कठिन है डगर पनघट की

जुल्मी बड़ी, औक़ात पे ये रात आई है
मन तो है मेरा पावन, मगर यौवन हरजाई है

हो, कैसे हो मिलन बाँके पिया से?
जान मेरी अटकी

बहुत कठिन है डगर पनघट की
पन-पन-पन-पनघट की
(पन-पन-पन-पनघट की)
पन-पन-पन-पनघट की
बहुत कठिन है डगर पनघट की

पन-पन-पन-पनघट की
(पन-पन-पन-पनघट की)
पन-पन-पन-पनघट की
बहुत कठिन है डगर पनघट की

पनघट पे गट-गट कर के पीती रहती
पीती रहती, पीती रहती, पीती रहती
साँवरिया, बिन सजना क्यूँ जीती रहती?
जीती रहती, जीती रहती, जीती रहती, जी...

पनघट पे गट-गट कर के पीती रहती
पीती रहती, पीती रहती, पीती रहती
साँवरिया, बिन सजना क्यूँ जीती रहती?
जीती रहती, जीती रहती, जीती रह- (अच्छा)

पटति, पटः, पटन्ति, क्यों तू इतना बनती?
घणा attitude घमंडी, पर बनेगी तू मेरी बंदी (बंदी)
बहुत कठिन है डगर पनघट की

सैयाँ, बाबू जी बम्बइया, तेरी बटरफ़लैया
कब से बैठी तेरी राह तके
हैया, अपने प्यार की नैया बीच भँवर में, दैया
पार लगा, जोगन के भाग जगें

ओ, मेरी फुलझड़ियो रे
सबर ज़रा करियो रे

सबर करते हुए कितना भरूँ
मैं handpump से मटकी?

बहुत कठिन है डगर पनघट की
पन-पन-पन-पनघट की
(पन-पन-पन-पनघट की)
पन-पन-पन-पनघट की
बहुत कठिन है डगर पनघट की

पन-पन-पन-पनघट की
(पन-पन-पन-पनघट की)
पन-पन-पन-पनघट की
बहुत कठिन है डगर पनघट की

पनघट पे गट-गट कर के पीती रहती
पीती रहती, पीती रहती, पीती रहती
साँवरिया, बिन सजना क्यूँ जीती रहती?
जीती रहती, जीती रहती, जीती रहती

पन-पन-पन-पन-पन-पन...
(पन-पन-पन-पन-पन...)
पन-पन-पन-पन-पन-पन...
बहुत कठिन है डगर पनघट की
पन-पन-पन-पनघट की



Credits
Writer(s): Jigar Mukul Saraiya, Amitabh Bhattacharya, Sachin Jaykishore Sanghvi
Lyrics powered by www.musixmatch.com

Link