Mujhe Mujhse Kaun Bachayega

हर बार की तरह तैयार मैं
खून की नदियों की धार मैं
बचने का कोई रस्ता नहीं
मौत का हूँ गले में हार मैं

आता है जीना यूँ ही कोई समझ ना पाएगा
अब मुझको ये नरक़ से कौन खिंच पाएगा?

तेरे बिन, तेरे बिन, तेरे बिन
मुझे मुझसे कौन बचाएगा तेरे बिन?

तेरे बिन, तेरे बिन, तेरे बिन
मुझे मुझसे कौन बचाएगा तेरे बिन?
तेरे बिन, तेरे बिन, तेरे बिन
मुझे मुझसे कौन बचाएगा तेरे बिन?

मरघट आज बनेगी सारी ये ज़मीं
लाशों को देख के कहूँगा "आफ़रीं"
साँस लेने का जो रोग फैला है यहाँ
बन के दवा मैं उसको छोड़ूँगा नहीं

मैल जो है दिमाग़ में वो साफ़ हो ना पाएगा
अब मुझको ये नरक़ से कौन खिंच पाएगा?

तेरे बिन, तेरे बिन, तेरे बिन
मुझे मुझसे कौन बचाएगा तेरे बिन?
तेरे बिन, तेरे बिन, तेरे बिन
मुझे मुझसे कौन बचाएगा तेरे बिन?



Credits
Writer(s): Anupam Roy
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