Datt Ke Khel

बिच बवंडर घिरी हैं कश्ती
बिच बवंडर घिरी हैं कश्ती

धुल हो गई सारी हस्ती, तुझ संग बैठ के तार लगाए
हो
तुझ संग बैठ के तार लगाए
गली मोहल्ला बस्ती बस्ती...
माना कि चलना कठिन होगा
पर कल एक बेहतर दिन होगा
तू चलता चल बस रुकना नही
तू चलता चल बस रुकना नही
ठाना तो सब मुमकिन होगा...

डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के

सारे हिन्द कि नज़र तुझी पे टिकी हुई है
एक तुझी में आस सभी को लगी हुई है...
कठिन क्षणों में खेल अनोखा खेल रहा तू
"धीरज धर के" चक्रव्यू को भेद रहा तू...
पराक्रमी तू अभिमन्यु सा लड़ते जाना
अर्जुन बन के रण भूमि को जीत के आना।

जीत के आना...

डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के
डट के खेल जट डट के

रे पंच बैकफुट पे करना दांत सबके खट्टे।
सीना चौड़ा फ्रंटफुट पे अप्पा चक देने फट्टे
कलाइयों से प्रहार जैसे हाथो में तलवार...
धाकड़ खेले जट्ट, गेंद सीमा रेखा पार।

ये सारे देश की पुकार

सारा हिंद है शुमार

और कसम भोलेनाथ की

यो जीत की घड़ी

से यो जीत का त्योहार।

जटिल घड़ी को मोड़ रहा तू
बाईस गज पे दौड़ रहा तू...
समझ बूझ का परिचय देकर
हालातों को साध रहा तू...

सकल व्योम विस्तार "तू ही हैं"
जीत हार का सार "तू ही है"
उम्मीदों के टूटे धांगे
रेशा रेशा बांध रहा तू

खामोशी में शोर ग़जब है, खेल नहीं है ये मजहब है।

तू ही ईश्वर, तू ही अल्ला, तू ईसा और तू ही रब है।

डट के खेल जट
डट के खेल डट डट के खेल जट डट के
(विश्व धरा पे मान बढ़ाया, जीत ही हद थी लो जीत ही आया।।।)



Credits
Writer(s): Love Ink
Lyrics powered by www.musixmatch.com

Link