Rahen Na Rahen

रहें ना रहें हम, महका करेंगे
बनके कली, बनके सबा बाग़-ए-वफ़ा में
रहें ना रहें हम...

मौसम कोई हो, इस चमन में
रंग बनके रहेंगे हम फ़िज़ा में
चाहत की ख़ुशबू यूँ ही ज़ुल्फ़ों से
उड़ेगी ख़िज़ाँ हो या बहारें

यूँ ही झूमते...
यूँ ही झूमते और खिलते रहेंगे
बनके कली, बनके सबा बाग़-ए-वफ़ा में
रहें ना रहें हम, महका करेंगे
बनके कली, बनके सबा बाग़-ए-वफ़ा में

खोए हम ऐसे, क्या है मिलना
क्या बिछड़ना, नहीं है याद हमको
कूचे में दिल के जब से आए
सिर्फ़ दिल की ज़मीं है याद हमको

इसी सरज़मीं...
इसी सरज़मीं पे हम तो रहेंगे
बनके कली, बनके सबा बाग़-ए-वफ़ा में
रहें ना रहें हम...

जब हम ना होंगे, जब हमारी
ख़ाक पे तुम रुकोगे चलते-चलते
अश्कों से भीगी चाँदनी में
इक सदा सी सुनोगे चलते-चलते

वहीं पे कहीं...
वहीं पे कहीं हम तुमसे मिलेंगे
बनके कली, बनके सबा बाग़-ए-वफ़ा में
रहें ना रहें हम, महका करेंगे
बनके कली, बनके सबा बाग़-ए-वफ़ा में
रहें ना रहें हम...



Credits
Writer(s): Majrooh Sultanpuri, Roshan
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