Dil bhi rone laga

दो दिन भी नहीं हुए तुमको गए हुए
दर्द बे-हिसाब होने लगा
दो दिन भी नहीं हुए तुमको गए हुए
दर्द बे-हिसाब होने लगा

आँखें तो रोती हैं अक्सर
आँखें तो रोती हैं अक्सर
दिल भी रोने लगा

दो दिन भी नहीं हुए तुमको गए हुए
दर्द बे-हिसाब होने लगा
दर्द बे-हिसाब होने लगा

ओ, दुनिया से आजकल कम बात होती है
ख़ामोशियों में दिन और रात होती है

ऐसा क्यूँ लगता है हर पल?
ऐसा क्यूँ लगता है हर पल?
मैं तुझे खोने लगा, हाँ

दो दिन भी नहीं हुए तुमको गए हुए
दर्द बे-हिसाब होने लगा

ओ, तन्हा तेरी यादों की पनाहों में बैठकर
दिन-रात बस एक तेरी राहों में बैठकर

तेरे इंतज़ार वाले, मैं
तेरे इंतज़ार वाले, मैं
लम्हें पिरोने लगा

दो दिन भी नहीं हुए तुमको गए हुए
दर्द बे-हिसाब होने लगा



Credits
Writer(s): Kumaar, Sushant-shankar
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