Jaag Dard-E-Ishq

जाग दर्द-इ-इश्क जाग, जाग दर्द-इ-इश्क जाग
दिल को बेक़रार कर, छेड़ के आंसुओ का राग
जाग दर्द-इ-इश्क जाग, जाग दर्द-इ-इश्क जाग

किसको सुनाऊ दास्ता, किसको दिखाऊ दिल के दाग
जाऊ कहां की दूर तक, जलाता नही कोई चिराग.
राख बन चुकी है आग, राख बन चुकी है आग
दिल को बेक़रार कर, छेड़ के आंसुओ का राग
जाग दर्द-इ-इश्क जाग,

ऐसी चली हवा-इ-गम, ऐसा बदल गया समा.
रूठ के मुझ से चल दिए ...
रूठ के मुझ से चल दिए, मेरी ख़ुशी के कारवा
दस रहे है गम के नाग
जाग दर्द-इ-इश्क जाग, जाग दर्द-इ-इश्क जाग
दिल को बेक़रार कर, छेड़ के आंसुओ का राग
जाग दर्द-इ-इश्क जाग,

आंख ज़रा लगी तेरी, सारा जहा सो गया
ये ज़मीन सो गई, आसमान सो गया
सो गया प्यार का चिराग
जाग, जाग, जाग, जाग



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