Kabira

कैसी तेरी खुजगर्ज़ी
न धूप चुने न छांव
कैसी तेरी खुजगर्ज़ी
किसी ठौर टिके न पांव
कैसी तेरी खुजगर्ज़ी
न धूप चुने न छांव
कैसी तेरी खुजगर्ज़ी
किसी ठौर टिके न पांव

बन गया अपना पैगंबर
तर लिया तू सात समन्दर
फिर भी सूखा मन के अंदर
क्यूं रह गया

रे कबीरा, मान जा
रे फकीरा, मान जा
आ जा तूझको पुकारे तेरी परछाईंयाँ
रे कबीरा, मान जा
रे फकीरा, मान जा
कैसा तू है निरमोही कैसा हरजाईया!

टूटी चारपाई वही
ठंडी पुरवाई रस्ता देखे
दूध की मलाई वही
मिट्टी की सुराही रस्ता देखे

टूटी चारपाई वही
ठंडी पुरवाई रस्ता देखे
दूध की मलाई वही
मिट्टी की सुराही रस्ता देखे

कैसी तेरी खुजगर्ज़ी
लब नमक रमें न मिसरी
कैसी तेरी खुजगर्ज़ी
तूझे प्रीत पुरानी बिसरी
मस्त मौला मस्त कलंदर
तू हवा का एक बवंडर
बुझ के यूँ अंदर ही अंदर
क्यूं रह गया

रे कबीरा, मान जा
रे फकीरा, मान जा
आ जा तूझको पुकारे तेरी परछाईंयाँ
रे कबीरा, मान जा
रे फकीरा, मान जा
कैसा तू है निरमोही कैसा हरजाईया



Credits
Writer(s): Bhattacharya Amitabh, Chakraborty Pritaam
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