Lamha Lamha

लम्हा लम्हा दूरी यूँ पिघलती है
जाने किस आग में यह शबनम जलती है
हो लम्हा लम्हा दूरी यूँ पिघलती है
जाने किस आग में यह शबनम जलती है
ख्वाहिशों की शाम ढलती हैं
ख्वाहिशों की शाम ढलती हैं
जाने किस आग में यह शबनम जलती है

तेरी आँखें दिखती है हमें सपनें सितारों के
तेरे होठों पे लिखा है जो तुम बोले इशारों में
ख़्वाबों के कारवां में रात चलती है
जाने किस आग में यह शबनम जलती है

बहकती शाम आयी है तुझे लेकर के बाहों में
तुझे छू लूँ के राखु मैं छुपाकर के निगाहों में
शरमाती इठलाती है मचलती है
जाने किस आग में यह शबनम जलती है

लम्हा लम्हा दूरी यूँ पिघलती है
जाने किस आग में यह शबनम जलती है
ख्वाहिशों की शाम ढलती हैं
ख्वाहिशों की शाम ढलती हैं
जाने किस आग में यह शबनम जलती है



Credits
Writer(s): Pritam, Neelesh Misra, Misra Neelesh
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