Ya Rabba (Remix)

ना पूछो दर्दमंदों से
हँसी कैसी? ख़ुशी कैसी?
मुसीबत सर पर रहती है
कभी कैसी, कभी कैसी

प्यार है या सज़ा? ऐ मेरे दिल बता
टूटता क्यूँ नहीं दर्द का सिलसिला?
इस प्यार में हों कैसे-कैसे इम्तेहाँ?
ये प्यार लिखे कैसी-कैसी दास्ताँ

या रब्बा, दे-दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो, या रब्बा, दे-दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर

हो, प्यार है या सज़ा? ऐ मेरे दिल बता
टूटता क्यूँ नहीं? दर्द का सिलसिला

कैसा है सफ़र वफ़ा की मंज़िल का?
ना है कोई हल दिलों की मुश्क़िल का
धड़कन-धड़कन बिख़री रंजिशें
साँसें-साँसें टूटी बंदिशें

कहीं तो हर लम्हा होंठों पे फ़रियाद है
किसी की दुनिया चाहत में बर्बाद है

या रब्बा, दे-दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो, या रब्बा, दे-दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर

कोई ना सुने सिसकती आहों को
कोई ना धरे तड़पती बाहों को
आधी-आधी पूरी ख़्वाहिशें
टूटी-फूटी सब फ़रमाइशें

कहीं शक है, कहीं नफ़रत की दीवार है
कहीं जीत में भी शामिल पल-पल हार है

या रब्बा, दे-दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो, या रब्बा, दे-दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर

हो, प्यार है या सज़ा? ऐ मेरे दिल बता
टूटता क्यूँ नहीं दर्द का सिलसिला?



Credits
Writer(s): Sameer
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