Kuchh Na Kaho

कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो
क्या कहना है, क्या सुनना है
मुझको पता है, तुमको पता है
समय का ये पल थम सा गया है
और इस पल में कोई नहीं है
बस एक मैं हूँ, बस एक तुम हो

कितने गहरे हलके, शाम के रंग है छलके
परबत से यूँ उतरे बादल, जैसे आँचल ढलके
और इस पल में...

सुलगी सुलगी साँसें, बहकी बहकी धड़कन
महके महके शाम के साए, पिघले पिघले तनमन
और इस पल में...



Credits
Writer(s): R.d. Burman, Javed Akhtar
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