Dua (MTV Unplugged Version)

किसे पूछू है ऐसा क्यों
बेजुबां सा ये जहाँ है

खुसी के पल कहाँ ढूँढू
बेनिशाँ सा वक़्त भी यहाँ है

जाने कितने लबों पे गीले है
ज़िन्दगी से कई फासले हैं

पसीजते है सपने क्यों आँखों में
लकीरे जब छूटे इन हाथों में यूँ बेवजह

जो भेजी थी दुआ
वो जाके आसमान से यूँ टकरा गई
के आ गयी है लौट के सदा
जो भेजी थी दुआ
वो जाके आसमान से यूँ टकरा गई
के आ गयी लौट के सदा
ओ ओ ओ...

साँसों ने कहाँ रुख मोड़ लिया
कोई राह नज़र में ना आये
धड़कन ने कहाँ रुख छोड़ दिया
ये साये मेरे जिस्मों में साये

यही बार-बार सोचता हूँ तनहा मैं यहाँ
मेरे साथ-साथ चल रहा है यादों का धुआँ

जो भेजी थी दुआ
वो जाके आसमान से यूँ टकरा गई
के आ गयी लौट के सदा
जो भेजी थी दुआ
वो जाके आसमान से यूँ टकरा गई
के आ गयी लौट के सदा
ओ ओ ओ...

जो भेजी थी दुआ
वो जाके आसमान से यूँ टकरा गई
के आ गयी लौट के सदा
जो भेजी थी दुआ
वो जाके आसमान से यूँ टकरा गई
के आ गयी लौट के सदा
जो भेजी थी दुआ
वो जाके आसमान से यूँ टकरा गई
के आ गयी लौट के सदा
ओ ओ ओ...



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