Ahl-e-Dil

अहल-ए-दिल यूँ भी निभा लेते हैं
दर्द सीने में छुपा लेते हैं

ज़ख्म जैसे भी मिले, ज़ख्मों से
दिल के दामन को सजा लेते हैं
दर्द सीने में छुपा लेते हैं

अपने क़दमों पे मोहब्बत वाले
आसमानों को झुका लेते हैं
दर्द सीने में छुपा लेते हैं



Credits
Writer(s): N/a Khaiyyaam, Naqsh Lyallpuri
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