O Jiji

ओ जीजी
क्या कह के उनको बुलाओगी
दूल्हा बन के जो आयेंगे
ए-जी, ओ-जी हम न कहेंगे
हम तो इशारों में बातें करेंगे
सब जैसे अपने उनको बुलाते हैं
वैसे हम न बुलायेंगे
ओ छोटी...

शादी है दिल्ली का लड्डू, लड्डू ये हर मन में फूटे
इसका लगे हर दाना भला
जो खाये पछताए, जो ना खाये वो पछताए
तो खाकर ही पछताना भला
ये लड्डू तुझको भी इक दिन खिलायेंगे
तेरे साजन जब आयेंगे
ओ छोटी

मीठी हैं बृज की मिठाई, लड्डू पेड़ा बालूशाही
पर सबसे मीठी हो तुम जीजी
कंचन के जैसी खरी है, रस ये रस की भरी है
गन्ने की गंडेरी है तू छोटी
बृज की ये मीठी मिठाई सदा के लिए
जीजा बांध ले जायेंगे
ओ जीजी

गाने को तुम गा रही हो, जी अपना बहला रही हो
नज़र तो है राहों में लगी
ए छोटी तू खोटी बड़ी है, बहना को बस छेड़ती है
मैं तो यहाँ कामों में लगी
आने दो जीजी तुम्हारे जी की दशा
जीजा को बताएँगे



Credits
Writer(s): Ravindra Jain
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