Kaise Mujhe (From "Ghajini")

कैसे मुझे तुम मिल गयी
क़िस्मत पे आयी ना यकीं
उतर आई झील में
जैसे चाँद उतरता है कभी
हौले हौले, धीरे से

गुनगुनी धूप की तरह से तरन्नुम में तुम
छूके मुझे गुज़री हो यूँ
देखूं तुम्हें या मैं सुनूं
तुम हो सुकूं, तुम हो जुनूं
क्यूं पहले ना आयी तुम

कैसे मुझे तुम मिल गयी
हो हो
क़िस्मत पे आये ना यकीं
हो हो

मैं तो ये सोचता था
के आजकल उपरवाले को फ़ुर्सत नहीं
फिर भी तुम्हें बनाके वो
मेरी नज़र में चढ़ गया
रुतबे में वो और बढ़ गया

बदले रास्ते झरने और नदी
बदले दीप की टीमटीम
छेड़े ज़िंदगी धुन कोई नयी
बदली बरखा की रिमझिम

बदलेंगी ऋतुयें अदा
पर मैं रहूंगी सदा
उसी तरह तेरी बाँहों में बाहें डाल के
हर लम्हा, हर पल

ज़िंदगी सितार हो गई
रिमझिम मल्हार हो गई
मुझे आता नहीं क़िस्मत पे अपनी यकीं
कैसे मुझको मिली तुम



Credits
Writer(s): Prasoon Joshi
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