Raat Kya Maange

रात क्या माँगे इक सितारा, लहर क्या माँगे इक किनारा
धरती माँगे छाँव गगन की, बाती माँगे ज्योत आँगन की
माँ अपने मुन्ने का सहारा

रात क्या माँगे इक सितारा, लहर क्या माँगे इक किनारा
धरती माँगे छाँव गगन की, बाती माँगे ज्योत आँगन की
माँ अपने मुन्ने का सहारा
रात क्या माँगे इक सितारा, लहर क्या माँगे इक किनारा

लाल मेरे, जब भी लेती हूँ मैं बाँहों में तुझको
ऐसा लगता है, फूलों ने जैसे छुआ है मुझको

आँचल में हँसने लगता है...
आँचल में हँसने लगता है मेरे मौसम सारा
रात क्या माँगे इक सितारा, माँ अपने मुन्ने का सहारा

वो दिन जब राहों में चलूँगी हाथ पकड़ के तेरा
उस दिन सचमुच अपना लगेगा मुझको जीवन मेरा

तेरी आँखों से देखूँगी...
तेरी आँखों से देखूँगी मंज़िल का उजियारा
रात क्या माँगे इक सितारा, माँ अपने मुन्ने का सहारा

झूम उठेगा दिल मेरा जब दौड़ के तू आएगा
"माँ" कहकर छाती से मेरी जब तू लग जाएगा

हट जाएगा राह से मेरी...
हट जाएगा राह से मेरी बरसों का अँधियारा

रात क्या माँगे इक सितारा, लहर क्या माँगे इक किनारा
धरती माँगे छाँव गगन की, बाती माँगे ज्योत आँगन की
माँ अपने मुन्ने का सहारा

रात क्या माँगे इक सितारा, माँ अपने मुन्ने का सहारा
रात क्या माँगे इक सितारा, माँ अपने मुन्ने का सहारा



Credits
Writer(s): Anu Malik, Gorakhpuri Zafar
Lyrics powered by www.musixmatch.com

Link