Aajkal Paon Zaamin Par Nahin Padte

आजकल पाँव ज़मीं पर नहीं पड़ते मेरे
आजकल पाँव ज़मीं पर नहीं पड़ते मेरे
बोलो, देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए?
आजकल पाँव ज़मीं पर नहीं पड़ते मेरे

जब भी थामा है तेरा हाथ तो देखा है
जब भी थामा है तेरा हाथ तो देखा है
लोग कहते हैं कि बस हाथ की रेखा है
हमने देखा है दो तक़दीरों को जुड़ते हुए

आजकल पाँव ज़मीं पर नहीं पड़ते मेरे
बोलो, देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए?
आजकल पाँव ज़मीं पर नहीं पड़ते मेरे

नींद सी रहती है, हलका सा नशा रहता है
रात-दिन आँखों में एक चेहरा बसा रहता है
पर लगी आँखों को देखा है कभी उड़ते हुए, बोलो?

आजकल पाँव ज़मीं पर नहीं पड़ते मेरे
बोलो, देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए?
आजकल पाँव ज़मीं पर नहीं पड़ते मेरे

जाने क्या होता है, हर बात पे कुछ होता है
दिन में कुछ होता है और रात में कुछ होता है
थाम लेना जो कभी देखो हमें उड़ते हुए

आजकल पाँव ज़मीं पर नहीं पड़ते मेरे
बोलो, देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए?
आजकल पाँव ज़मीं पर नहीं पड़ते...



Credits
Writer(s): R D Burman, Gulzar
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