Nazar Mujhse

नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं
नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं

ज़बाँ ख़ामोश है लेकिन निगाहें बात करती हैं
ज़बाँ ख़ामोश है लेकिन निगाहें बात करती हैं
अदाएँ लाख भी रोको, अदाएँ बात करती हैं

नज़र नीची किए दाँतों में उँगली को दबाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं

छुपाने से, मेरी जानम, कहीं क्या प्यार छुपता है
छुपाने से, मेरी जानम, कहीं क्या प्यार छुपता है
ये ऐसा मुश्क़ है, ख़ुश्बू हमेशा देता रहता है

तुम तो सब जनती हो फिर भी क्यूँ मुझे सतती हो?
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं

तुम्हारे प्यार का ऐसे हमें इज़हार मिलता है
तुम्हारे प्यार का ऐसे हमें इज़हार मिलता है
हमारा नाम सुनते ही तुम्हारा रंग खिलता है

और फिर साज़-ए-दिल पर तुम हमारे गीत गाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं

तुम्हारे घर मैं जब आऊँ तो छुप जाती हो परदे में
तुम्हारे घर मैं जब आऊँ तो छुप जाती हो परदे में
मुझे जब देख ना पाओ तो घबराती हो परदे में

ख़ुद ही चिलमन उठा कर फिर इशारों से बुलाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं

नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं
नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं



Credits
Writer(s): Hasrat Jaipuri, Ahmed Hussain, Mohd. Hussain
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