Aadmi Khilona Hai, Pt. 1

तृष्णा, माया, लोभ में भटक रहा इंसान
नज़रों से खोने लगी अपनों की पहचान

तृष्णा, माया, लोभ में भटक रहा इंसान
नज़रों से खोने लगी अपनों की पहचान

बस इसी बात का ही तो रोना है
आदमी खिलौना है, आदमी खिलौना है

रब जो चाहे वही तो होना है
आदमी खिलौना है, आदमी खिलौना है



Credits
Writer(s): Saifi Nadeem, Rathod Shravan, Pandy Sameer (t)
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