Hamari Hi Mutthi Mein, Pt. 2

हमारी ही मुट्ठी में आकाश सारा
जब भी खुलेगी चमकेगा तारा
(हमारी ही मुट्ठी में आकाश सारा)
(जब भी खुलेगी चमकेगा तारा)

कभी ना ढले जो वो ही सितारा
दिशा जिससे पहचाने संसार सारा
(हमारी ही मुट्ठी में आकाश सारा)
(जब भी खुलेगी चमकेगा तारा)

हमारी ही मुट्ठी में आकाश सारा
जब भी खुलेगी चमकेगा तारा

हथेली पे रेखाएँ हैं सब अधूरी
किसने लिखी है नहीं जानना है
(हथेली पे रेखाएँ हैं सब अधूरी)
(किसने लिखी है नहीं जानना है)

सुलझाने उनको ना आएगा कोई
समझना है उनको ये अपना करम है
अपने करम से दिखाना है सबको
ख़ुद का पनपना, उभरना है ख़ुद को

अँधेरा मिटाएँ जो नन्हा शरारा
दिशा जिससे पहचाने संसार सारा
(हमारी ही मुट्ठी में आकाश सारा)
(जब भी खुलेगी चमकेगा तारा)

हमारी ही मुट्ठी में आकाश सारा
जब भी खुलेगी चमकेगा तारा

हमारे पीछे कोई आए ना आए
हमें ही तो पहले पहुचना वहाँ है
(हमारे पीछे कोई आए ना आए)
(हमें ही तो पहले पहुचना वहाँ है)

जिन पर हैं चलना नई पीढ़ीयों को
उन्हीं रास्तों को बनाना हमें हैं
जो भी साथ आए उन्हें साथ ले ले
अगर ना कोई साथ दे तो अकेले

सुलगाके ख़ुद को मिटा ले अँधेरा
दिशा जिससे पहचाने संसार सारा
(हमारी ही मुट्ठी में आकाश सारा)
(जब भी खुलेगी चमकेगा तारा)

कभी ना ढले जो वो ही सितारा
दिशा जिससे पहचाने संसार सारा
(हमारी ही मुट्ठी में आकाश सारा)
(जब भी खुलेगी चमकेगा तारा)



Credits
Writer(s): Laxmikant Pyarelal, Mangesh Kulkarni
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