Kanha Unplugged (From "Shubh Mangal Saavdhan")

ऊँची-ऊँची डोरियों पे बाँध ले गगर
पर ना, माने ना, कान्हा माने ना
ऊँची-ऊँची डोरियों पे बाँध ले गगर
पर ना, माने ना, कान्हा माने ना

जग जो बिछाए, हर जाल काट रे
मक्खन चुराए हर माल चाट ले
मुरली से करे ऐसी trick, टिक-टिक-टिक

पनघट की है बड़ी...
पनघट की है बड़ी कठिन डगर
पर ना, माने ना, कान्हा माने ना

बीच आवे लाज काहे?
बदरा बुलावे काहे धीर धरे सजनी?
सुरमई रुत भई
आजा, दोनों यमुना के तीर चलें संगिनी

मन में भ्रमर गुनगुनावे
काहे सखी तू घबरावे?
प्रेम तेरा-मेरा बड़ा fit, fit, fit, fit
आज तू बहाने चाहे कितने भी कर
पर ना, माने ना, कान्हा माने ना

जग जो बिछाए, हर जाल काट रे
मक्खन चुराए हर माल चाट ले
मुरली से करे ऐसी trick, टिक-टिक-टिक

पनघट की है बड़ी...
पनघट की है बड़ी कठिन डगर
पर ना, माने ना, कान्हा माने ना



Credits
Writer(s): Vaibhav Shrivastava, Tanishk Baagchi Daas
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