Tum Hardafa Ho

तुम नया एहसास हो
जन्नती बरसात हो
तुम नया एहसास हो
जन्नती बरसात हो

धूप जितनी है सुबह की
उतने मेरे पास हो

तुम हसीं लम्हात हो
राहतों की बात हो
ख्वाबों को रख के लबों पे
गुनगुनाती रात हो

तुम हो दिन के उजालो में भी
रब सा खयालों में भी
तुम हरदफा हो

तुम हो मेरी आवाज़ों में भी
बिन बोले वादों में भी
तुम हरदफा हो

हाँ साथ में मेरे रात बिताने
नींद की तरह आओ सिरहाने
तुम मेरी मुस्कान हो
तुम ही मेरी जान हो
मैं हूँ पल बेचैनियों का
तुम मेरा आराम हो

तुम हो दिन के उजालो में भी
रब सा खयालों में भी
तुम हरदफा हो

तुम हो मेरी आवाज़ों में भी
बिन बोले वादों में भी
तुम हरदफा हो

मैं बहना चाहूँ तुम्हीं से होके
तेरे ही किनारे मुझे फिर रोके

तुम मेरी पहचान हो
तुम ही मेरा नाम हो
मैं हूँ लम्हा दोपहर का
तुम सुबह हो शाम हो

तुम हो दिन के उजालो में भी
रब सा खयालों में भी
तुम हरदफा हो

तुम हो मेरी आवाज़ों में भी
बिन बोले वादों में भी
तुम हरदफा हो



Credits
Writer(s): Abhay Kumar Upadhyay, Ankit Tiwari
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