Meer-E-Kaarwan (from "Lucknow Central")

ओ बन्देया, ओ बन्देया
ओ बन्देया, ओ बन्देया
ओ बन्देया, ओ बन्देया

तेरी मंजिलें हुई गुमशुदा
फिर भी रास्ता है तेरा मेहेरमां
ओ मीर-ए-कारवां
तेरी राहों पे रवां
के मेरे नसीबों में
हो कोई तो दुआ

ओ मीर-ए-कारवां
ले चल मुझे वहाँ
ये रात बने जहाँ सुबह
मीर-ए-कारवां
ओ मीर-ए-कारवां

हो, बस कर दिल अब बस कर भी
हो, बस कर दिल अब बस कर भी

उस राह मुझे जाना ही नहीं
पल दो पल का साथ सफर
फिर होगी जुदा रहगुज़र
नदिया थाम के जो बहते रहे
मिलते हैं वो किनारे कहाँ
ओ मीर-ए-कारवां
तेरी राहों पे रवां
के मेरे नसीबों में
हो कोई तो दुआ
ओ मीर-ए-कारवां
ले चल मुझे वहाँ

ये रात बने जहाँ सुबह
मीर-ए-कारवां

ओ मीर-ए-कारवां

बहार क्यूं तेरे दर ना आती
है क्या भरम जो नज़र दिखाती

अब और कितनी ये रात बाकी
है रात बाकी ये रात बाकी
निगल ना जाए तूझे ये साये

गले में घुटती है सर्द आहें

बता ओ बंदे क्यूं मात खाये क्यूं मात खाये रे
हाँ, लागे ना दिल अब लागे नहीं

हाँ, लागे ना दिल अब लागे नहीं
मेरे पैरों तले निकली जो ज़मीन
इस बस्ती में था मेरा घर
उसे किस की लगी फिर नज़र

वो जो सपनों का था काफिला
ऐसा झुलसा की अब है धुआं
ओ मीर-ए-कारवां
तेरी राहों पे रवां
के मेरे नसीबों में
हो कोई तो दुआ
ओ मीर-ए-कारवां
ले चल मुझे वहाँ
ये रात बने जहाँ सुबह
मीर-ए-कारवां (चल अकेला राही)
चल चल अकेला राही (ओ मीर-ए-कारवां)
हाफ़िज़ तेरा इलाही
हाफ़िज़ तेरा इलाही
चल अकेला राही
चल चल अकेला राही
हाफ़िज़ तेरा इलाही
हाफ़िज़ तेरा इलाही
चल अकेला राही
चल चल अकेला राही
हाफ़िज़ तेरा इलाही
हाफ़िज़ तेरा इलाही
चल अकेला राही
चल चल अकेला राही
हाफ़िज़ तेरा इलाही
हाफ़िज़ तेरा इलाही



Credits
Writer(s): Rochak Kohli, Adheesh Verma
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