Pal Mein Khaffa Kabhi

पल में ख़फ़ा, कभी पल में मगन
पल में ख़फ़ा, कभी पल में मगन
है बात क्या, ऐ, शोला बदन?
कभी तो बुझती, कभी भड़कती, फिरती हो कहाँ?
दुश्मन है वो जाँ का ढूँढों उसे, मैं परेशाँ यहाँ-वहाँ

पल में ख़फ़ा, कभी पल में मगन
है बात क्या, ऐ, शोला बदन?
कभी तो बुझती, कभी भड़कती, फिरती हो कहाँ?
दुश्मन है वो जाँ का ढूँढों उसे, मैं परेशाँ...

चिंगारियाँ हसीन आँखों की
ऐ, मेरी शम्मा किसे जलाएँगी आज?
चिंगारियाँ हसीन आँखों की
ऐ, मेरी शम्मा किसे जलाएँगी आज?

ये ना पूछो, देखे जाओ ये सुलगती सी नज़र
कैसे-कैसे छुपने वाले चेहरों से पर्दा हटाएगी आज?

पल में ख़फ़ा, कभी पल में मगन
है बात क्या, ऐ, शोला बदन?
कभी तो बुझती, कभी भड़कती, फिरती हो कहाँ?
दुश्मन है वो जाँ का ढूँढों उसे, मैं परेशाँ...

कैसे बचोगे मेरी नज़र से?
देखो ना जान-ए-मन ये हैं चिराग़ों की शाम
कैसे बचोगे मेरी नज़र से?
देखो ना जान-ए-मन ये हैं चिराग़ों की शाम

इन चराग़ों की ज़ुबाँ पर नाम जिस का लिखा है
ज़ालिमों का, क़ातिलों का समझो कि है आज किस्सा तमाम

पल में ख़फ़ा, कभी पल में मगन
है बात क्या, ऐ, शोला बदन?
कभी तो बुझती, कभी भड़कती, फिरती हो कहाँ?
दुश्मन है वो जाँ का ढूँढों उसे, मैं परेशाँ...



Credits
Writer(s): Majrooh Sultanpuri, Anand Chitragupta Shrivastava, Milind Chitragupta Shrivastava
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