Tujh Mein Rab Dikhta Hai

तू ही तो जन्नत मेरी
तू ही मेरा जूनूँ
तू ही तो मन्नत मेरी

तू ही रूह का सुकूँ
तू ही अँखियों की ठंडक
तू ही दिल की है दस्तक
और कुछ ना जानूं मैं, बस इतना ही जानूं

तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
सजदे सर झुकता है, यारा मैं क्या करुँ
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ

कैसी है ये दूरी?
कैसी मजबूरी?
मैंने नज़रों से तुझे छू लिया
हो-हो-हो, कभी तेरी ख़ुशबू
कभी तेरी बातें
बिन मांगे ये जहां पा लिया

तू ही दिल की है रौनक
तू ही जन्मों की दौलत
और कुछ ना जानूं, बस इतना ही जानूं

तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
सजदे सर झुकता है, यारा मैं क्या करुँ
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ

वसदी वसदी वसदी, दिल दी दिल विच वसदी
नसदी नसदी नसदी, दिल रो वे थे नसदी
रब ने बना दी जोड़ी, हाय
वसदी वसदी वसदी, दिल दी दिल विच वसदी
नसदी नसदी नसदी दिल रो वे थे नसदी

छम छम आयें, मुझे तरसाए
तेरा साया छेड़ के चूमता
हो-हो-हो, तू जो मुस्काए
तू जो शरमाये
जैसे मेरा है ख़ुदा झूमता

तू ही मेरी है बरकत, तू ही मेरी इबादत
और कुछ ना जानूं, बस इतना ही जानूं

तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
सजदे सर झुकता है, यारा मैं क्या करुँ
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ

वसदी वसदी वसदी, दिल दी दिल विच वसदी
नसदी नसदी नसदी, दिल रो वे थे नसदी
रब ने बना दी जोड़ी, हाय



Credits
Writer(s): Jaideep Sahni, Sulaiman Merchant, Salim Sadruddin Merchant
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