Song: Silsila Ye Chahat Ka

मौसम ने ली अंगड़ाई आई आई
लहराके बरखा फिर छाई छाई छाई
झोंका हवा का आएगा
और ये दीया बुझ जाएगा
सिलसिला ये चाहत का
न मैंने बुझने दिया
सिलसिला ये चाहत का
न मैंने बुझने दिया
ओ पिया ये दीया
ना बुझा है ना बुझेगा
मेरा चाहत का दीया
मेरे पिया अब आजा रे मेरे पिया
मेरे पिया अब आजा रे मेरे पिया
इस दीप संग जल रहा
मेरा रोम-रोम-रोम और जिया
अब आजा रे मेरे पिया
हो मेरे पिया अब आजा रे मेरे पिया

फ़ासला था दूरी थी
फ़ासला था दूरी थी
था जुदाई का आलम
इंतज़ार में नज़रें थी
और तुम वहाँ थे
तुम वहाँ थे
तुम वहाँ थे
झिलमिलाते जगमगाते
खुशियों में झूम कर
और यहाँ जल रहे थे हम
और यहाँ जल रहे थे हम
सिलसिला ये चाहत का
न दिल से बुझने दिया
ओ पिया ये दीया
सिलसिला ये चाहत का
न दिल से बुझने दिया
ओ पिया ये दीया
ऐ पिया पिया पिया



Credits
Writer(s): Ismail Darbar, Nusrat Badr
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