Tulsi Ki Ramayan Bole

रघुकुल रीत सदा चली आई
प्राण जाई पर वचन ना जाई

तुलसी की रामायण बोले, "रामचरित अपनाओ"
(तुलसी की रामायण बोले, "रामचरित अपनाओ")

धर्म-कर्म की मर्यादा में...
धर्म-कर्म की मर्यादा में जीवन सफल बनाओ

तुलसी की रामायण बोले, "रामचरित अपनाओ"
(तुलसी की रामायण बोले, "रामचरित अपनाओ")

गा-रे-गा-पा-मा-गा-रे-गा
मा-धा-नी-धा-मा-रे

नर्तन राम हैं, नारी सीता, समझो रे, नर-नारी
नर्तन राम हैं, नारी सीता, समझो रे, नर-नारी
मंगल हो आदर्श जीवन का
जीवन हो सुखकारी

मात-पिता, गुरु, भ्रात प्रेम की सोई प्रीत जगाओ

(तुलसी की रामायण बोले, "रामचरित अपनाओ")
तुलसी की रामायण बोले, "रामचरित अपनाओ"

(रामचरित अपनाओ, जीवन सफल बनाओ)
(रामचरित अपनाओ, जीवन सफल बनाओ)

लोक और परलोक सुधारो
राम की शरण में आकर
सा-नी-सा, पा-मा-पा, सा-नी-सा

लोक और परलोक सुधारो
राम की शरण में आकर
आए जग में, जाओ जग से
राम का चरित संजोकर

रामचरित की बनकर शोभा महको और महकाओ

तुलसी की रामायण बोले, "रामचरित अपनाओ"
(तुलसी की रामायण बोले, "रामचरित अपनाओ")

गा-गा-रे-सा-नी-रे-गा-मा-धा-पा, रे-मा-गा-रे-नी-रे-गा
म-ध-मा-धा-मा-गा-रे-रे, सा-नी-धा-मा-गा-रे

राजा होकर, रंक रहे जो, बने जगत हितकारी
राजा होकर, रंक रहें जो, बने जगत हितकारी
एक नज़र से सबको देखे
बनके राम पुजारी

अन्याई को दंडित करके सबको न्याय दिलाओ

तुलसी की रामायण बोले, "रामचरित अपनाओ"
तुलसी की रामायण बोले, "रामचरित अपनाओ"

(रामचरित अपनाओ, जीवन सफल बनाओ)
(रामचरित अपनाओ, जीवन सफल बनाओ)
(...जीवन सफल बनाओ)
(...जीवन सफल बनाओ)



Credits
Writer(s): Anup Jalota
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