Khairiyat by Sakshi Holkar

ऐ दो जहाँ के मालिक, सुन ले मेरी गुज़ारिश
ऐ दो जहाँ के मालिक, सुन ले मेरी गुज़ारिश
मेरे जिगर के टुकड़े के वास्ते ये ख़्वाहिश

वो जहाँ भी, जिस जगह हो, तेरा हाथ सर पे रखना
हर दम, हर घड़ी, हाँ, तू फ़िकर उसकी करना
उसे ख़ैरियत से रखना, उसे ख़ैरियत से रखना
उसे ख़ैरियत से रखना, बस ख़ैरियत से रखना

कभी तेज़ धूप उसका बदन जला ना पाए
हाँ, कभी तेज़ धूप उसका बदन जला ना पाए
कभी बारिशें भी उसको बीमार कर ना पाएँ

हो, लिहाफ़ तन पे उसके तेरे हाथों से तू ढकना
उसको लगे ना ठोकर, इतना तू करम करना
उसे ख़ैरियत से रखना, उसे ख़ैरियत से रखना
उसे ख़ैरियत से रखना, बस ख़ैरियत से रखना



Credits
Writer(s): Mithoon
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