Beda Paar

हो, छोड़ के चली मैं घर पिया जी के साथ
नाम उनका ही बोलें मेहँदी के हाथ
पल्लू आँखों तक आया, कैसे हों नज़रें चार?
सैयाँ जी संग है तो लगेगा बेड़ा पार, होय

हाय, पहना है suit-boot हमरा पिया
सातों जनम का ticket है लिया

हो, अब इस सफ़र की हुई है शुरुआत
थामा इन्होंने जब हाथों में हाथ
अनजानी सी डगर है, ये जिया बेक़रार
सैयाँ जी संग है तो लगेगा बेड़ा पार, होय

हो, अंगना में पेड़ वहाँ होगा कि नहीं?
होगा तो झूला उस पे होगा कि नहीं?
खर्राटे सैयाँ जी लेंगे तो नहीं?
लेते होंगे तो सोने देंगे कि नहीं?

हो, "काम पर जो जाएँ सैयाँ, आएँ फिर रात
जब घर ना होंगे, किस से करूँगी बात?"
ये सारे ही सवाल मैं सोचूँ लगातार
सैयाँ जी संग है तो लगेगा बेड़ा पार, होय



Credits
Writer(s): Ram Sampath, Mrighdeep Singh Lamba
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