Kar Salaam

क्यूँ ज़िंदगी से हो शिकवा-गिला?
क्यूँ ज़िंदगी से हो शिकवा-गिला?
ये हँसती है, रोती है, जो भी है, जैसी है
जो भी ये देती है, वो है तेरा

कर सलाम, कर सलाम
कर सलाम, कर सलाम

नख़रे उठा, इसके नख़रे उठा
नख़रे उठा, इसके नख़रे उठा
हाँ, धूप भी ये है, छाँव भी ये है
जो भी ये कहती है, तू मन जा

कर सलाम, कर सलाम
कर सलाम, कर सलाम

खो जाना, पा जाना, ना पाना
है ज़िंदगी जान ले
बिक जाना, लुट जाना, बस जाना
है ज़िंदगी मान ले

हो-हो-हो, कर ले यक़ीं जो कल गया
वो फिर से आता नहीं
हो-हो-हो, गुज़रा हुआ जो वक़्त है
वो दस्तक लगाता नहीं

जो आज है, बस वही है तेरा
जो आज है, बस वही है तेरा
हाँ, क्या तेरी हस्ती है, मिट्टी की बस्ती है
पल में ही हो जाती है ये फ़ना

कर सलाम, कर सलाम
कर सलाम, कर सलाम

क्यूँ ज़िंदगी से हो शिकवा-गिला?
क्यूँ ज़िंदगी से हो शिकवा-गिला?
ये हँसती है, रोती है, जो भी है, जैसी है
जो भी ये देती है, वो है तेरा

कर सलाम, कर सलाम
कर सलाम, कर सलाम

कर सलाम, कर सलाम
कर सलाम, कर सलाम
कर सलाम, कर सलाम
कर सलाम, कर सलाम



Credits
Writer(s): Sayeed Quadri, Pritam Chakraborty
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