Ghar Yaad Aata Hai Mujhe

वो गर्मियों की रात, वो जाड़े की बात
वो पानी का मटका, रसोई की आग
सब सताता है मुझे

घर याद आता है मुझे
घर याद आता है मुझे

साथी एक साथ है, इतनी सी बात है
वो पेड़, वो आँगन दिखाना है उसे
कहता है रोज़ मन मुझे

घर याद आता है मुझे
हो, घर याद आता है मुझे

जिन दिलों में रहा मैं बरसों तक
एक हिस्सा उनमें मेरा भी था
फिर वहीं रहना है मुझे

घर याद आता है मुझे
घर याद आता है मुझे

सहमी चौखट पे खड़े मेरा मन ये कहे
प्यार करना सीखा था तुम से
प्यार तुम से फिर पाना है
कितनी दोगे सज़ा? अब तो दे दो दुआ
इंतज़ार अब है मुझे

घर याद आता है मुझे
हो, घर याद आता है मुझे
घर याद आता है मुझे
हो, घर याद आता है मुझे



Credits
Writer(s): Ram Sampath, Payyambra Jayakumar
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