Teri Marzi Aye Khuda

ओ, ऐ ख़ुदा, तेरी मर्ज़ी के आगे क्या होगा?
है पता तू जो चाहे वैसा समाँ हो, तेरी रज़ा
तू जो चाहे तप्ती धूप में
ऐ ख़ुदा, खिलता हुआ गुलिस्ताँ होगा

तूने बनाई राहें, तूने बनाई मंज़िल
हम ले चले हैं अपना कारवाँ
ऐ ख़ुदा, तेरी मर्ज़ी के आगे क्या होगा?
ऐ खुदा

टहनी-टहनी से देखो टूटा है हर पत्ता
बिखरा हुआ पड़ा है आज ये गुलिस्ताँ
झिलमिलाता यहाँ, मुस्कुराता यहाँ
था खुशी से कभी ये आशियाँ

रहबर हो तुम हमारे, फिर कैसा दिया फ़रमान?
फ़रिश्ते भी रुसवा होंगे देख के ये अंजाम
ये ना चाहे कोई अब बता दे तू ही
कह कर अपना तू क्यूँ बनता अंजान?

ऐ ख़ुदा, तेरी मर्ज़ी के आगे क्या होगा?
है पता, तू जो चाहे वैसा समाँ हो, तेरी रज़ा
तू जो चाहे तप्ती धूप में
ऐ ख़ुदा, खिलता हुआ गुलिस्ताँ होगा

तूने बनाई राहें, तूने बनाई मंज़िल
हम ले चले हैं अपना कारवाँ



Credits
Writer(s): Hanif Shaikh
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