Mamta Bhare - Sad

माना, आज घायल तेरा ज़मीर है
दोष नहीं तेरा, दोषी तेरी तक़दीर है
जो ना पढ़ सका कोई ये वो तहरीर है
ये जो है मुक़द्दर, ये तो पत्थर पे लक़ीर है

किसने यहाँ देखा क़िस्मत का लेखा?
कौन यहाँ होनी को होने से टाल सका?
जान सका है ये कौन यहाँ
ले जाए किस को नसीब कहाँ?



Credits
Writer(s): Anand Chitragupta Shrivastava, Milind Chitragupta Shrivastava, Deepak Chaudhary
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