Sargoshiyo Ke Kya Silsile Hai

एहसास ख्वाहिशों का साँसों में मर ना जाए
सदियाँ गुज़र गई हैं, लमहा गुज़र ना जाए

सरगोशियों के क्या सिलसिले हैं
मदहोशियों में दो दिल मिले हैं
फिर आशिक़ी के मौसम खिले हैं
सरगोशियों के क्या सिलसिले हैं
मदहोशियों में दो दिल मिले हैं

सीली-सीली रातें मेरी, भीगे-भीगे दिन
जीना मेरा क्या है जीना यारा, तेरे बिन?
ना कहीं है सुकूँ, ना कहीं है सबर
चाहतें कह रहीं, चाहूँ मैं इस क़दर
ओ, ना तुझे होश हो, ना मुझे हो ख़बर

सरगोशियों के क्या सिलसिले हैं
हो, मदहोशियों में दो दिल मिले हैं
फिर आशिक़ी के मौसम खिले हैं
सरगोशियों के क्या सिलसिले हैं
मदहोशियों में दो दिल मिले हैं

आती-जाती साँसें मेरी तेरा नाम ले हैं
तेरी यादें तनहाई में दामन थाम ले हैं
आ के बाँहों में अरमाँ मचलने लगे
प्यार की आँच से हम पिघलने लगे
ओ, सर्द मौसम में भी गेसू जलने लगे

सरगोशियों के क्या सिलसिले हैं
मदहोशियों में दो दिल मिले हैं
फिर आशिक़ी के मौसम खिले हैं
सरगोशियों के क्या सिलसिले हैं
मदहोशियों में दो दिल मिले हैं



Credits
Writer(s): Sameer, Sami Adnan
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