Woh Lamha

वो लम्हा जिसे जिया ही ना था
है वो ठहरा हुआ तेरी-मेरी राहों में
आजा, इस को धड़का लें बाँहों में
जो ना हुआ पहले कभी, अब हो जाने दे

वो लम्हा जिसे जिया ही ना था
है वो ठहरा हुआ तेरी-मेरी राहों में
आजा, इस को धड़का लें बाँहों में
जो ना हुआ पहले कभी, अब हो जाने दे

निगाहों में ये जो इशारे हैं
हाँ, अफ़साने इन में तुम्हारे हैं
मेरी बातें तेरे लफ़्ज़ों में हैं गुमशुदा
मेरी साँसें चले ले के तेरा रास्ता

हुई जो मुलाक़ातें, सोचे मेरी आँखें
हुई जो मुलाक़ातें, सोचे मेरी आँखें
है तू आज ख़्वाबों में या सामने

वो लम्हा जिसे जिया ही ना था
है वो ठहरा हुआ तेरी-मेरी राहों में
आजा, इस को धड़का लें बाँहों में
जो ना हुआ पहले कभी, अब हो जाने दे



Credits
Writer(s): Kumaar, Veer Samarth
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