Aasmani Rang (From "Alfaaz")

वो अभी तक पुल पर खड़ी थी
अतीत से आती हूई हँसी और आवाज़ बहुत दूर नहीं लगी
ऐसे ही लगा जैसे आवाज़ अभी तक बीती नहीं है
शायद कोहरे मे हाथ बढ़ाये तो छू ही ले उसे
घड़ी देखी, सेकेंड की सूई अपने पहरे पर parade कर रही थी
और अभी तक उसके आने की कोई आहट नहीं थी
रात मे शागाफ़ आ गया था - crack आ गया था
आधी रात कट चुकी थी
वो रात भी ऐसे ही कटी थी
इकेसवी मंजिल पर एक घूमते हुए restaurant मे
शायद टोरंटो मे था
वो दो ही थे और घड़ी देखी थी
तो उसने अपना हाथ रख दिया था उसपर
कितना बड़ा हाथ था उसका
उसकी दोनों कलियाँ बंद हो जाया करतीं थी, lock हो जाती थीं
अपनी बोझिल आँखों से उसने देखा था उसकी तरफ
और उसकी आँखों की आवाज़ सुनाई दी थी
तुम्हारी आँखों का रंग भी तो आसमानी है

आसमानी रंग हैं, आसमानी आँखों का

आसमानी रंग हैं, आसमानी आँखों का
आँखों में उड़ने दो
आँखों में उड़ने दो

आसमानी रंग हैं, आसमानी आँखों का
आसमानी रंग हैं, आसमानी आँखों का

आसमां से वक़्त का परिंदा जब उड़े तो शाम होती है

शाम होती ही परिंदे आशियाँ में लौट आते हैं

आसमानी आँखें हैं
शाम होती है तो रस्म है, चाँद का चराग जलता है

चाँद का चराग जब जले, तो पंछी सो जाते हैं

पंछी रात में अकेले सोते जागते हैं
साथ कोई सोये तो
नर्म नर्म ख्वाब आते हैं
ख्वाबों में उड़ने दो

आसमानी रंग है, आसमानी आँखों का
आसमानी रंग है, आसमानी आँखों का

कलाइयों से खोल दो ये
नब्ज़ की तरह तड़पता वक़्त तंग करता है

कलाइयों पे जब से मने तेरे हाथ पहने हैं
रुक गयी है नब्ज़ और
वक़्त उड़ता रहता है
आसमान काट कर, पहन ले जिस्म पर
रूहों को उड़ने दो

आसमानी रंग है, आसमानी आँखों का
आसमानी रंग है, आसमानी आँखों का
आँखों में उड़ने दो
आँखों में उड़ने दो



Credits
Writer(s): Gulzar, Vishal Bhardwaj
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