Jo Hum Kaam Karte Hain

बोल, बोल, बोल सियापति रामचंद्र की (जय)
राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट
अंत समय पछताएगा, जब प्राण जाएँगे छूट, हाँ-हाँ

कोई लूटे या ना लूटे, हम लूट के रहेंगे
जो ताले, ताले कभी ना टूटे, वो टूट के रहेंगे

के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं
ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!

के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं
ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!
के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं
ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!

(के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं)
(ना जाने दुनियाँ वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!)

चलती चक्की देख के दिया कबीरा रोए
हम दो पाटन के बीच में साबित बचा ना कोए
अरे, सब हुमको लल्लू कहें, पंजू कहे ना कोए
जो हमको पंजू कहे वो ख़ुद वो ख़ुद उल्लु, लल्लू होए

के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं
ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!
(के हम जो काम करते हैं वो खुले आम करते हैं)
(ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!)

आ-हा-हा-हा, चित्रकूट के घाट पर...
अबे चुप, उल्लू की दुम फाँकता
मित्रकूट के घाट पर भई चोरन की भीर
चरण दास चंदन घिसे, चंदन घिसे
तिलक करे रणवीर

फ़ोकट का चंदन घिस मेरे लल्लू
घिस मेरे लल्लू फ़ोकट का चंदन

तीर सदा वो मारिए, कह गए पीर फ़क़ीर
देखन में छोटे लगे, घाव करे गंभी
अरे, घाव करे गंभीर

के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं
ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!
(के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं)
(ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!

उस्ताद, साँच बराबर तप नहीं
अबे चुप, अक्कल के कोलु, चिलगोज़े के छिलके
झूठ बराबर तप नहीं, साँच बराबर पाप
जाके हृदय जूठ है, वाके हृदय आप
एक-एक को तोल के ऐसा देंगे नाप
जो समझें बेटा हमें, अरे, हम हैं, हम हैं उनके बाप

के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं
ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!
(के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं)
(ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!

अरे, गुरु चले बैकुण्ठ को, चेला कहे बुलाए?
(गुरु चले बैकुण्ठ को, चेला कहे बुलाए?)

हिंयाँ तम्बाकू खाए लो, हुँवाँ तम्बाकू ना आए
(हिंयाँ तम्बाकू खाए लो, हुँवाँ तम्बाकू ना आए)
हिंयाँ तम्बाकू खाए लो, हुँवाँ तम्बाकू ना आए
हुँवाँ तम्बाकू ना आए

के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं
ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!

(के हम जो काम) करते हैं (वो खुलेआम) करते हैं
(ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!) ओ, दुनिया वाले, बदनाम करते हैं
(के हम जो काम करते हैं वो खुलेआम करते हैं) काम करते हैं
(ना जाने दुनिया वाले क्यूँ हमें बदनाम करते हैं!)



Credits
Writer(s): Bappi Lahiri, Prakash Mehra
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