Idhar Bhi Nazar Ho

इधर भी नज़र हो कि, ऐ जान-ए-आलम
तुझे किस तमन्ना से हम देखते हैं

इधर भी देख लो...
इधर भी देख लो रह जाए हौसला दिल का
इधर भी देख लो रह जाए हौसला दिल का

बस इक निगाह पे...
बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का
इधर भी देख लो रह जाए हौसला दिल का
इधर भी देख लो...

कभी ना इतना हुआ कि हमसे नज़र मिलाकर के हाल सुनते
कभी ना इतना हुआ कि हमसे नज़र मिलाकर के हाल सुनते
सदाएँ कब से लगा रहा हैं, कभी तो दिल का सवाल सुनते

कभी तो प्यार से...
कभी तो प्यार से देखो कि हो भला दिल का

बस इक निगाह पे...
बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का
इधर भी देख लो रह जाए हौसला दिल का
इधर भी देख लो...

इशारे ही इशारे हम ये जो कुछ कह गए, जानाँ
इशारे ही इशारे हम ये जो कुछ कह गए, जानाँ
नहीं समझे तो फिर क्यूँ मुस्कुरा कर रह गए, जानाँ?

तसल्ली दे हमें और हमको तड़पाए
अब आगे जो मिज़ाज-ए-यार में आए

तुम्हीं पे छोड़ दिया...
तुम्हीं पे छोड़ दिया है मुआमला दिल का

बस इक निगाह पे...
बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का
इधर भी देख लो रह जाए हौसला दिल का
इधर भी देख लो...



Credits
Writer(s): Majrooh Sultanpuri, Anand-milind
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