Laai Hayat Aaye Kaja

लाई हयात आए क़ज़ा, ले चली चले
अपनी ख़ुशी न आए न, अपनी ख़ुशी चले

बेहतर तो है यही के ना, दुनिया से दिल लगे
पर क्या करें जो काम ना, बे-दिल-लगी चले

दुनिया ने किसका राह-ए-फ़ना में दिया है साथ
तुम भी चले चलो यूँ ही, जब तक चली चले

जाते हवा-ए-शौक़ में है, इस चमन से 'ज़ौक़'
अपनी बला से बाद-ए-सबा अब कभी चले
लाई हयात आये आए क़ज़ा, ले चली चले



Credits
Writer(s): K.l.saigal, Zauq
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