Sapnon Se Bhare Naina

बगिया-बगिया बालक भागे
तितली फिर भी हाथ न लागे
इस पगले को कौन बताये?
ढूँढ रहा है जो तू जग में
कोई जो पाए तो मन में ही पाए

सपनों से भरे नैना
तो नींद है न चैना
सपनों से भरे नैना
तो नींद है न चैना

ऐसी ड़गर कोई अगर जो अपनाए
हर राह के वो अंत पे रस्ता ही पाए
धूप का रस्ता जो पैर जलाये
मोड़ तो आये, छाँव न आये
राही जो चलता है चलता ही जाए
कोई नहीं है जो कहीं उसे समझाए

सपनों से भरे नैना
तो नींद है न चैना
सपनों से भरे नैना
तो नींद है न चैना

(नैना रे.)
(नैना रे...)
(नैना रे...)
(नैना रे...)

दूर ही से सागर जिसे हर कोई माने
पानी है वो या रेत है? यह कौन जाने
जैसे के दिन से रैन अलग है
सुख है अलग और चैन अलग है
पर जो यह देखे वो नैना अलग है
चैन है तो अपना सुख है पराये

सपनों से भरे नैना
तो नींद है न चैना
सपनों से भरे नैना
तो नींद है न चैना
सपनों से भरे नैना-नैना-नैना-नैना
सपनों से भरे नैना-नैना-नैना-नैना-नैना
नैना.
सपनों से भरे नैना-नैना-नैना-नैना-नैना
नैना...
नैना...



Credits
Writer(s): Javed Akhtar
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