Dhatt Tere Ki

इनके मीठे-मीठे बोल
इनके बड़े-बड़े हैं झोल
कुछ समझ ना आए रे
कुछ समझ ना आए रे

इनके मीठे-मीठे बोल, इनके बड़े-बड़े हैं झोल
कुछ समझ ना आए रे
इनकी नीति गोल-गोल, जनता बनी हुई बकलोल
कुछ कह भी ना पाए रे

घोटालों की चढ़ी है मस्ती, बिन पतवार चले ये कश्ती
काले धन से भरें अटैची, गई ना ऐठन जल गई रस्सी
किससे कहें रे हम ये आपबीती?

भ्रष्ट नेता की राजनीति, धत तेरे की, ऐसी की तैसी
लाखों-करोड़ खा गई कुर्सी, धत तेरे की, ऐसी की तैसी

धत तेरे की, ऐसी-तैसी
धत तेरे की, ऐसी-तैसी

अरे, कुर्सी मालामाल हो गई, जनता मरी फ़िरती
राजनीति व्यावसाय बन गई, नहीं किसी की सुनती
जिनके vote पे राज करें, ये उनको ही पिटवाते
लोकतंत्र परलोक बस गया, ये "Leader" कहलाते
अरे, राष्ट्रगीत आवे ना इनको, "देशभक्त" कहलाते

इनके झूठे हैं सब बोल, खुलती जाए इनकी पोल
नहीं छुपे छुपाए रे
इनके मीठे-मीठे बोल, इनके बड़े-बड़े हैं झोल
कुछ समझ ना आए रे

घोटालों की चढ़ी है मस्ती, बिन पतवार चले ये कश्ती
काले धन से भरें अटैची, गई ना ऐठन जल गई रस्सी
किससे कहें रे हम ये आपबीती?

भ्रष्ट नेता की राजनीति, धत तेरे की, ऐसी की तैसी
लाखों-करोड़ खा गई कुर्सी, धत तेरे की, ऐसी की तैसी

रोटी और रसोई महँगी, कदम-कदम पे हाथ की तंगी
अपनी दुनिया है बेरंगी, इनकी दुनिया सतरंगी
राज हम ही से, ताज हम ही से, फ़िर भी हैं हम हक्का-बक्का
घर के हैं ना घाट के हम तो, लागे धक्के पे धक्का

आँखें खोलो, तोड़ो सपना
वरना बचेगा नहीं देश ये अपना

इनका होता गोल-मोल, फ़िर भी बने हुए अनमोल
इनसे राम बचाए रे
इनकी नीति गोल-गोल, जनता बनी हुई बकलोल
कुछ कह भी ना पाए रे

घोटालों की चढ़ी है मस्ती, बिन पतवार चले ये कश्ती
काले धन से भरें अटैची, गई ना ऐठन जल गई रस्सी
किससे कहें रे हम ये आपबीती?

भ्रष्ट नेता की राजनीति, धत तेरे की, ऐसी की तैसी
लाखों-करोड़ खा गई कुर्सी, धत तेरे की, ऐसी की तैसी



Credits
Writer(s): Liyakat Nazir Ajmeri, Ahmed Siddiqui, Laxmi Narain Pandey
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