O Re Piya

मैं ना माँगू महल अटारी, ना हीरों का कंगन
तू मेरा चंदन, तू मेरा कंचन, तू मेरे मन का दर्पन
तेरा मेरा नाता जैसे धरा गगन का संगम

ओ रे पिया तू ही है मन का चैन
ओ रे पिया तू ही है मन का चैन

सुध-बुध छीनी तूने मोरी कर दी ना बेचैन
सुध-बुध छीनी तूने मोरी कर दी ना बेचैन

प्रीत के रंग में ऐसी डूबी भूल गई दिन रैन
तुमसे जुदा ये नैन (तुमसे जुदा ये नैन)

ओ रे पिया तू ही है मन का चैन (मन का चैन)
ओ रे पिया तू ही है मन का चैन (मन का चैन)

मेरी लाज सुहाग तुम ही तो हो
मेरी लाज सुहाग तुम ही तो हो
मैंने जग से नाता तोड़ लिया
तुझे पहन लिया, तुझे ओड़ लिया
तुझे रोम-रोम संग जोड़ लिया

हो, साजन तू एक साचा लागे
झुटे जग के बैर
तू ही है मन का चैन (मन का चैन)

ओ रे पिया तू ही है मन का चैन
ओ रे पिया तू ही है मन का चैन (मन का चैन)

सर्दी में तू ओंट लगे
सर्दी में तू ओंट लगे
गर्मी में सीतल छाया (गर्मी में सीतल छाया)
सौ जनमों का साथ दोबारा एक जनम में पाया

ओ गल बैया तुम मोरी साजन
तुम नैनन के नैन
तू ही है मन का चैन (मन का चैन)

ओ रे पिया तू ही है मन का चैन (मन का चैन)
ओ रे पिया तू ही है मन का चैन (मन का चैन)



Credits
Writer(s): Liyakat Nazir Ajmeri, Husna Azam Khan
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