Sawan

बरखा ना सुहाय, तेरे बिन
कलकत्ते वाले पिया, कब आओगे तुम

तुमको आने में, तुमको आने में
तुमको आने में, तुमको बुलाने में
कई सावन बरस गए साजना
तुमको आने में, तुमको बुलाने में
कई सावन बरस गए साजना

ढूँढते, ढूँढते
ढूँढते-ढूँढते ही ज़माने में
कई सावन बरस गए साजना
तुमको आने में, तुमको बुलाने में
कई सावन बरस गए साजना

दाग़ हैं दिल में लाखों गहरे, हाय
दाग़ हैं दिल में लाखों गहरे
नयन में अपने कजरा ना ठहरे
नयन में अपने कजरा ना ठहरे

सपनों में आके मिला क्या सताने में?
कई सावन बरस गए साजना
तुमको आने में

तुमको आने में, आने में, आने में
कई सावन बरस गए साजना

बीत गया जुग पतियाँ काहे हाए
रूठे बलम को कौन समझावे
बीत गया जुग पतियाँ काहे
रूठे बलम को कौन समझाए

मन की उमंगो को रो कर सुनाने में
कई सावन बरस गए साजना
तुमको आने में, तुमको बुलाने में
कई सावन बरस गए साजना

पाके विदेश में सौतन कोई
अरे चैन ना लागे ओ निरमोही
पाके विदेश में सौतन कोई
चैन ना लागे ओ निरमोही

ओ निरमोही, ओ निरमोही
ओ निरमोही, ओ निरमोही
पाके विदेश में सौतन कोई
चैन ना लागे ओ निरमोही

रतियों में बिंदिया सजाने मिटाने में
कई सावन बरस गए साजना
कई सावन, सावन, सावन
कई सावन, सावन, सावन
कई सावन बरस गए साजना

ढूँढते, ढूँढते
ढूँढते-ढूँढते ही ज़माने में
कई सावन बरस गए साजना
कई सावन, सावन, सावन
कई सावन, सावन, सावन, सावन

कई सावन बरस गए साजना
कई सावन बरस गए साजना
कई सावन बरस गए साजना
कई सावन बरस गए साजना

बरखा ना सुहाय, तेरे बिन
कलकत्ते वाले पिया, कब अईहो, कब अईहो
कब अईहो तुम हो
अरे कलकत्ते वाले पिया



Credits
Writer(s): Ustad Shafaqat Ali Khan, Traditional, Muzzafar Ali
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